अचानक

शब्दसागर

अचानक क्रि॰ वि॰ [सं॰ आ=अच्छी तरह+ चक्=भ्रांत अथवा सं॰ अज्ञामात्] बिना पूर्वसूचना के । एकबारगी । सहसा । अकस्मात् । दैवात् । हठात् । औचट में । अनाचित्ते में । उ॰—(क)

अचानक खाते में आ जाएं लाखों-करोड़ों रुपये, तो फिर जनार्दन औटे की तरह मत फंसिएगा!

कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ लोगों के खाते में अचानक से हजारों से लेकर लाखों रुपये आ जाते हैं, और वो लोग जनार्दन औटे की ही तरह गलती कर बैठते हैं, जिसके लिए उन्हें पछताना पड़ता है.

क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपके खाते में अचानक से कुछ हजार से लेकर लाखों-करोड़ों रुपये आ गए हों. अगर हां तो आपने उनका क्या किया? कहीं आपने भी तो जनार्दन औटे वाली गलती नहीं कर ली, अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो जाए तो ध्यान रखें इन बातों का…

बिलकुल भी खर्च ना करें पैसे

अगर आपके खाते में इस तरह से अचानक पैसे आ जाते हैं, तो सबसे पहले गांठ बांध लें कि आप इनमें से एक भी रुपया खर्च ना करें, क्योंकि ये पैसे आपके नहीं है, इसलिए इस पर कानूनी तौर पर या नैतिक आधार पर आपका कोई अधिकार नहीं है. कई बार तकनीकी गड़बड़ी या बैंक कर्मचारी की मानवीय भूल के चलते ऐसा हो जाना संभव है, ऐसे में पैसे आपके खाते में आने से वो आपके नहीं होते. इतना ही नहीं अगर आप ये पैसे कहीं खर्च करते हैं और बाद में बैंक आपसे वापस मांगता है तो आपके लिए इतनी बड़ी रकम एक साथ जुटाना मुश्किल हो जाएगा.

बैंक की शाखा को सूचित करें

अगर आपके खाते में अचानक से ऐसी रकम आई है जिसके आने की आपको कोई उम्मीद नहीं थी. तो आपको इसकी सूचना बैंक को देनी चाहिए या खुद पूछताछ करनी चाहिए कि आपके खाते में ये रकम क्यों आई है? क्या पता ये रकम किसी अवैध लेनदेन से जुड़ी हो. इससे आप कानूनी पचड़ों में फंसने भी बचेंगे.

कुछ ना करें उस रकम का

अगर आप बैंक जाकर इस तरह के लेनदेन के बारे में सूचित नहीं करना चाहते, तो भी चलेगा. क्योंकि कई बार ऐसा देखने में आया है कि गलती से क्रेडिट हुई रकम को बैंक वापस खींच लेते हैं और फिर उसे सही खाते में पहुंचा देते हैं. बैंक के पास ये रकम आपसे वापस मांगने का कानूनी अधिकार होता है.

जनार्दन औटे ने की ये गलती

अब आप सोच रहे होंगे कि ये जनार्दन औटे कौन है, तो जनाब उनका पूरा नाम ज्ञानेश्वर जनार्दन औटे है और वह कोई फिक्शनल कैरेक्टर नहीं है, बल्कि वह महाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैठण तालुका के दावरवाड़ी के एक किसान हैं. पिछले साल अगस्त में एक दिन उनके जनधन खाते में अचानक से 15 लाख रुपये आ गए. उन्हें लगा कि ये रकम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2014 के चुनावी वादे के मुताबिक उन्हें भेजी है. इसके बाद उन्होंने उस रकम में से 9 लाख रुपये अपना घर बनवाने पर खर्च कर दिए. अब बैंक उनसे ये रकम वापस मांग रहा है.