काव्य का स्वरूप क्या है?

जॉन्सन ने इस परिभाषा में काव्य का प्रधान स्वरूप स्पष्ट किया है। ऐसी स्थिति में यह परिभाषा महत्त्वपूर्ण तो है, परन्तु इसमें कविता के कलात्मक पक्ष पर अधिक बल है। अधिकांश विचारकों ने कविता को कला के रूप में ही देखा है। में केवल एक दोष है अव्याप्ति का ।