Aaj dhup kab niklegi

दिन में कुहासा, गलन और सर्द हवा के साथ अब ठण्ड ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड में शनिवार को बारिश और बर्फबारी होने का अनुमान जताया गया है। उत्तराखण्ड में बारिश व बर्फबारी के चलते पश्चिमी यूपी में शनिवार को बदली-बारिश का मौसम रहेगा।

मौसम निदेशक जे.पी.गुप्ता का कहना है कि कोल्ड डे का यह सिलसिला लगातार बना नहीं रहेगा। शनिवार को इसमें कुछ कमी आएगी और फिर मौसम दिन में साफ भी होगा। केवल सुबह व रात में कोहरा छाएगा। उन्होंने बताया कि पश्चिमी यूपी में शनिवार को बदली-बारिश का मौसम रहेगा। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दरम्यान पूर्वी यूपी में कहीं घना तो कहीं बहुत घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी भी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 15 दिसम्बर तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में सुबह व रात में कहीं घना तो कहीं बहुत घना कोहरा छाया रहने के आसार हैं।  शुक्रवार को लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में पूरे दिन धूप नहीं निकली। कोल्ड डे के चलते लखनऊ सहित कई जिलों में शुक्रवार को दिन का तापमान सामान्य से कम रहा। शुक्रवार को प्रदेश में सबसे कम दिन का तापमान लखीमपुर खीरी में 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस कम रहा।
 
लखनऊ और आसपास के क्षेत्र में शुक्रवार को दिन का तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से 5 डिग्री कम रहा। इसके अलावा हरदोई, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बलिया, बांदा, फतेहगढ़ आदि जिलों में भी दिन का तापमान सामान्य से कम रहा। शुक्रवार की रात प्रदेश का सबसे ठण्डा स्थान फतेहगढ़ रहा जहां पारा 6.5 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज हुआ। यह सामान्य से 3 डिग्री कम रहा

इस बार मौसम का विचित्र रंग दिख रहा है। सारी परिस्थितियां अनुकूल हैं लेकिन न्यूनतम तापमान घट ही नहीं रहा। जब भी न्यूनतम पारा खिसकने के आसार होते हैं कि वायुमंडल में इस तरह की कोई न कोई मौसमी घटना घट जा रही कि पारा सामान्य से ऊपर चला जा रहा। मौसमविद इसके पीछे दो वजहों को जिम्मेदार मान रहे हैं। नवंबर में जहां इस बार पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति सामान्य से कम देखी गई, वहीं दिसंबर में अब तक चार बार पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी हो चुका है। पर्वतीय इलाकों में जब विक्षोभ प्रभावी होते हैं, उस समय सूबे का अधिकतम पारा तो नीचे आ जाता है लेकिन न्यूनतम तापमान में कमी देखी जाती है। विक्षोभों का प्रभाव खत्म होने के एक से दो दिनों बाद न्यूनतम तापमान तेजी से नीचे आता है। मौसमविदों ने अध्ययन में पाया कि इस बार पश्चिमी विक्षोभों की बारंबारता का अंतराल काफी कम रह रहा। एक विक्षोभ की वजह से मैदानी इलाकों का न्यूनतम पारा नीचे आने को हो रहा,  तब तक दूसरा विक्षोभ पर्वतीय इलाकों में प्रभावी हो जा रहा है। इस वजह से न्यूनतम तापमान के गिरने में वह तेजी नहीं देखी जा रही। हालांकि पिछले 24 घंटे मे पटना के न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री गिरावट के बाद यह आस जगी है कि जल्द ही पारा और नीचे आएगा।

सौर्य विकरण को रोक रहे बादल
अरब सागर से लगातार हो रही नमी की प्रवाह की वजह से सूबे के शहरों का न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रह रहा है। इस नमी की वजह से कोहरा तो बढ़ रहा है लेकिन न्यूनतम तापमान नीचे नहीं आ रहा। अधिकतर शहरों का न्यूनतम तापमान सामान्य से एक से सात डिग्री तक ऊपर है। यही वजह है कि रातें गर्म रह रही हैं। वायुमंडल में मध्यम और उच्च स्तर के बादल भी छाए हुए हैं, जो सूर्य के किरणों को पृथ्वी पर आने नहीं दे रहे। इस वजह से दिन का अधिकतम तामपान ऊपर नहीं चढ़ रहा है। मौसमविदों का कहना है कि सूबे में उत्तर पश्चिमी दिशा से आर्द्र हवाओं का चलना जारी है। जल्द ही उत्तर पश्चिमी दिशा से शुष्क हवाएं चलेंगी जिसके बाद  कनकनी बढ़ेगी और न्यूनतम पारा नीचे आएगा

पटना | एकसप्ताह से शहर का मौसम बेहद सर्द है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 15.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से कम होने के कारण हवा में गलन ज्यादा थी। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को भी ऐसा ही मौसम रहेगा। अधिकतम तापमान 16 डिग्री से कम ही रहने के आसार हैं। शिमला और अन्य उत्तरी क्षेत्रों में बर्फबारी रुकने के बाद ही तापमान में गिरावट रुकेगी। शनिवार से धूप खिलने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आरके गिरि ने कहा- इस महीने में ऐसी ही ठंड रहेगी। हालांकि शनिवार को दिन से थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। रविवार को मौसम साफ रहने की संभावना है।

25दिनों तक पड़ेगी ऐसी ठंड : अभीऔर 25 दिनों तक ठंड पड़ेगी। 20 जनवरी के बाद तापमान में गिरावट होना शुरू होता है। देश में दो महीने तक ठंड पड़ती है। कैस्पियन और ब्लैक सागर से आने वाली सर्द हवाअों के कारण ऐसा होता है।

फरवरी के अंत में जैसे ही हवा का रुख बदलता है, तापमान बढ़ने लगता है। तापमान बढ़ने से दबाव बढ़ने पर अधिक दबाव से कम दबाव की ओर चलने वाली पश्चिमी विक्षोभ की हवाएं बहुत ऊपर से निकलने लगती हैं।

इससे सर्दी का प्रभाव कम होने लगता है। अपने क्षेत्र में एेसा बदलाव फरवरी के अंतिम दस दिनों में शुरू हो जाता है। मार्च में मौसम पूरी तरह बदल जाता है।