Amrit ka vilom shabd

‌‌‌अमृत का विलोम शब्द और अर्थ

अमृत का विलोम शब्द विष होता है। आपने अमृत का नाम तो सुना ही होगा । अमृत ऐसा द्रव्य होता है। जिसको पीने के बाद इंसान अमर हो जाता है। प्राचीन काल से ऐसा विश्वास है। हालांकि आज तक इस प्रकार का अमृत किसी को नहीं मिला हालांकि इस प्रकार का अमृत खोजने के लिए लोग प्राचीन काल से ही उत्सुक थे ।‌‌‌हालांकि यह कोई भी नहीं जानता है कि अमृत इस धरती पर है या नहीं । लेकिन हर कोई अमृत चाहता है। ताकि वह उसे पी ले और उसके बाद उसे मौत का सामना नहीं करना पड़े । प्राचीन ग्रंथों के अंदर अमृत के बारे मे एक कथा आती है कि जब समुद्र मंथन हुआ तो उससे अमृत निकला था । और उस अमृत को देवता पी गए थे । और ‌‌‌बाद मे वे अमर हो गए थे ।

राजा बाली, परशुराम, विभीषण, हनुमानजी, वेदव्यास, अश्वत्थामा और कृपाचार्य आदि का नाम तो आपने सुना ही होगा । इनके बारे मे यह कहा जाता है कि यह चिरंजीवी थे ।और इनकी कभी भी मौत नहीं हुई थी। 

‌‌‌वेदों के अंदर भी अमृत को सोम रस के नाम से पुकारा जाता है।हालांकि सोम रस कैसा था और यह कहां पर पाया जाता था। इस बारे मे किसी को पता भी नहीं है। हालांकि विज्ञान ने बहुत अधिक तरक्की करली है लेकिन असल मे विज्ञान आज तक अमृत को नहीं ढूंढ पाया है।

‌‌‌विष का अर्थ

विष का दूसरा नाम जहर होता है। जहर का मतलब कोई ऐसा पदार्थ जो आपके शरीर को नुकसान पहुंचाता है। वह जहर होता है।इसके अंदर कोई भी कैमिकल आ सकता है। आजकल जो भी खाने पीने की चीजें हम लोग मार्केट से खरीद कर खाते हैं । वह दवाओं से बनी होती है। और उसके अंदर जहर ही होता है। यह बात अलग है कि ‌‌‌ यह धीमा जहर है जिसको खाने के तुरंत बाद ही पता नहीं चलता है। वरन लंबे समय बाद मे इसका नुकसान नजर आता है। इसी जहर के अंदर शराब भी एक धीमा जहर है । ‌‌‌और जब हम लंबे समय तक शराब पीते हैं या किसी और तरह का नशा करते हैं तो अंत मे कैंसर जैसी समस्याओं का आपको सामना करना पड़ता है।

‌‌‌अमृतपान का नतिजा कहानी

‌‌‌प्राचीन काल की बात है । एक जंगल के अंदर भानू नामक एक संत रहा करते थे ।उन्होंने सुन रखा था कि अमृत नामक एक रस होता है यदि कोई इंसान उसको पी लेता है तो वह सदा सदा के लिए अमर हो सकता है। इस अमृत के बारे मे उन्होंने आगे खोजा तो इसका उल्लेख अनेक ग्रंथों मे भी उन्होंने पढा । भानू ने पढ़ा कि ‌‌‌प्राचीन काल के अंदर कई ऐसे लोग थे जिन्होंने अमृत का सेवन किया था।

‌‌‌और उसके बाद वे सदा सदा के लिए अमर हो गए थे । यह सब जानकर भानू ने भी अमृत की खोज करनी काफी तेज करदी । वह जंगलो और पहाड़ों के अंदर काफी सालों तक ऐसे ही घूमता रहा लेकिन उसे अमृत का पता नहीं चल सका । एक दिन वह जंगल के अंदर आग जलाकर उदास बैठा था। तभी वहां से एक अन्य संत गुजरे तो भानू ने पूछा ….. ‌‌‌महाराज क्या आप मुझे अमृत का पता बता सकते हैं

संत ने एक बार तो भानू को आश्चर्य से देखा और बोला ……..नहीं मैं पता तो जानता हूं लेकिन अमृत हमारे लिए नहीं है।

……….लेकिन क्यों और उसके बाद भानू उन संत के पीछे हो गए । काफी समय तक संत की सेवा करते रहे । उसके बाद संत को एहसास हो गया कि ‌‌‌भानू हठ पकड़ चुका है और वह बिना अमृत पीये नहीं मानेंगा ।तो संत ने भानू को चेतावनी देते हुए कहा ……ठीक है। यहां से 100 किलोमीटर दूर एक गुफा उसके अंदर एक अमृत  का तालाब है । वहां पर जाओ लेकिन पीने से पहले एक बार मैं फिर कहता हूं यह तुम्हारे काम का नहीं है।

‌‌‌एक तो भानू के मन मे अमृत पीने की तीव्र इच्छा था और दूसरी अमर होने की लालसा तो वह तेजी से दिन रात चला और उस गुफा के अंदर पहुंच गया । अमृत के तालाब को देखकर उसकी आंखे चमक उठी और उसने अपने हाथों के अंदर जैसे ही उठाया आवाज आई ………ठहरो इसको मत पिना वरना बहुत पछताओगे ।

‌‌‌उसके बाद कौआ सुनाने लगा …….आज से 200 साल पहले मैं कौआ का राजा हुआ करता था। और अपने पत्नी और बच्चों के साथ आराम से रहता था। हम काफी  खुश थे और जीवन आराम से चल रहा था । एक बार जंगल के अंदर आग लग गई और मेरे पत्नी व बच्चे मारे गए । उसके बाद मुझे बहुत दुख हुआ और ‌‌‌मैंने एक संत की कुटिया के पास रहने लगा । वहां एक संत अमृत का पता बता रहे थे । हालांकि उन्होंने अमृत का पान नहीं किया था। जैसे ही मुझे पता चला कि अमृत को पीने के बाद अमर हो जाते हैं तो उसके बाद मैं उनके बताए मार्ग पर आया और इस तालाब से अमृत का पान कर लिया ।

‌‌‌कुछ दिनों तक तो मुझे अच्छा लगा लेकिन एक दिन किसी सांप ने मेरे शरीर को डस लिया और जिसकी वजह से मेरा शरीर रोग ग्रस्त हो गया । मैं काफी दर्द मे रहने लगा और अंत मे इस दर्द से छूटकारा पाने के लिए जलती आग मे गिर गया लेकिन आग मेरे शरीर को नहीं जला पाई । मैं काफी दशहत मे आ गया । और फिर ‌‌‌ मैंने खुद को मारने के अनेक प्रयास किये लेकिन इसमे सफल नहीं हो सका । आज मैं बस इसी गुफा मे रहता हूं । इस जीवन से छूटकारा पाना चाहता हूं लेकिन मेरे पास कोई उपाय नहीं है।

‌‌‌यदि तुम मेरे जैसे बनना चाहते हो तो अमृत पी लो ।

भानू कौवे की बात सुनकर वहां से बिना अमृत पीये ही लौट आया । वह जान गया था कि मौत यदि नहीं होगी तो जीवन ही बोझ लगने लगेगा ।