Bharat ki sabse purani nadi

भारत दुनिया का सबसे प्राचीन देश है। कम से कम 15 हजार वर्षों से यह देश सभ्य और सांस्कृतिक रूप से संपन्न है। इस देश ने 2000 ईसा पूर्व से 650 ईसा बाद तक अपने काल का सबसे अच्छा और स्वर्ण युग भोगा है। 650 के बाद विदेशी आक्रांताओं ने इस देश के वैभव, इतिहास और संस्कृति को धूल में मिला दिया।इस दौरान लाखों लोगों ने खुद के धर्म और संस्कृति को छोड़कर दूसरे देश के धर्म और संस्कृति के अपनाकर अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ा और इस तरह इस देश की बर्बादी का एक नया दौर भी चला। लेकिन इस सबके बावजूद यहां के मूल धर्म और संस्कृति को एक बहुत बड़े भू-भाग में बचाकर रखा। इसके पीछे हमारे वे योद्धा रहे जिन्हें अपनी जान दे दी या दुश्मनों की जान ले ली लेकिन अपने देश को हर हाल में बचाने का कार्य किया।  हालांकि पिछले 1300 सालों के दौरान इस देश का बहुत-कुछ वैभव नष्ट हो गया, फिर भी हमने ढूंढी हैं कुछ ऐसी प्राचीनतम बातें जिन्हें जानकर आपको अपने अतीत पर गर्व होगा। आओ जानते हैं कि भारत में सबसे प्राचीन अब क्या-क्या बचा है।भारत का सबसे प्राचीन शहर काशी : इजिप्ट (मिस्र), बगदाद, देहरान, मक्का, रोम, एथेंस, येरुशलम, बाइब्लोस, जेरिको, मोहन-जोदड़ो, हड़प्पा, लोनान, मोसुल आदि नगरों की दुनिया के प्राचीन नगरों में गिनती की जाती है, लेकिन पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार दुनिया का सबसे प्राचीन शहर वाराणसी है। दुनिया न भी माने, तो यह भारत का सबसे प्राचीन शहर है।

भारत में कई प्राचीन शहर हैं, जैसे मथुरा, अयोध्या, द्वारिका, कांची, उज्जैन, रामेश्वरम, प्रयाग (इलाहाबाद), पुष्कर, नासिक, श्रावस्ती, पेशावर (पुरुषपुर), बामियान, सारनाथ, लुम्बिनी, राजगिर, कुशीनगर, त्रिपुरा, गोवा, महाबलीपुरम, कन्याकुमारी, श्रीनगर, गांधार आदि, लेकिन काशी का स्थान इन सबमें सबसे ऊंचा है। काशी को ‘वाराणसी’ और ‘बनारस’ भी कहा जाता है। हालांकि प्राचीन भारत में 16 जनपद थे जिनके नाम इस प्रकार हैं- अवंतिका, अश्मक, कम्बोज, अंग, काशी, कुरु, कौशल, गांधार, चे‍दि, वज्जि, वत्स, पांचाल, मगध, मत्स्य, मल्ल और सुरसेन।

काशी की प्राचीनता : शहरों और नगरों में बसाहट के अब तक प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर एशिया का सबसे प्राचीन शहर वाराणसी को ही माना जाता है। इसमें लोगों के निवास के प्रमाण 3,000 साल से अधिक पुराने हैं। हालांकि कुछ विद्वान इसे करीब 5,000 साल पुराना मानते हैं, लेकिन हिन्दू धर्मग्रंथों में मिलने वाले उल्लेख के अनुसार यह और भी पुराना शहर है। विश्व के सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में काशी का उल्लेख मिलता है। यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ईपू की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को की 158 सूचियों में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है। इसका मतलब यह है कि 1800+2014= 3814 वर्ष पुरानी है काशी। वेद का वजूद इससे भी पुराना है। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ईपू से मानी है या‍नी आज से 6,500 वर्ष पूर्व। हालांकि हिन्दू इतिहास के अनुसार 10,000 वर्ष पूर्व हुए कश्यप ऋषि के काल से ही काशी का अस्तित्व रहा है। काशी : भारत के उत्तरप्रदेश में स्‍थित काशी नगर भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसा है। काशी संसार की सबसे पुरानी नगरी है। यह नगरी वर्तमान वाराणसी शहर में स्थित है। पुराणों के अनुसार पहले यह भगवान विष्णु की पुरी थी, जहां श्रीहरि के आनंदाश्रु गिरे थे, वहां बिंदु सरोवर बन गया और प्रभु यहां ‘बिंधुमाधव’ के नाम से प्रतिष्ठित हुए। महादेव को काशी इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने इस पावन पुरी को विष्णुजी से अपने नित्य आवास के लिए मांग लिया। तब से काशी उनका निवास स्थान बन गई। काशी में हिन्दुओं का पवित्र स्थान है ‘काशी विश्वनाथ’। भगवान बुद्ध और शंकराचार्य के अलावा रामानुज, वल्लभाचार्य, संत कबीर, गुरु नानक, तुलसीदास, चैतन्य महाप्रभु, रैदास आदि अनेक संत इस नगरी में आए। एक काल में यह हिन्दू धर्म का प्रमुख सत्संग और शास्त्रार्थ का स्थान बन गया था। दो नदियों ‘वरुणा’ और ‘असि’ के मध्य बसे होने के कारण इसका नाम ‘वाराणसी’ पड़ा। संस्कृत पढ़ने के लिए प्राचीनकाल से ही लोग वाराणसी आया करते थे। वाराणसी के घरानों की हिन्दुस्तानी संगीत में अपनी ही शैली है। सन् 1194 में शहाबुद्दीन गौरी ने इस नगर को लूटा और क्षति पहुंचाई। मुगलकाल में इसका नाम बदलकर मुहम्मदाबाद रखा गया। बाद में इसे अवध दरबार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रखा गया।