Chhote bacchon ki kahani

बच्चो के पास ज्ञान नहीं होता है। वह हर एक चीज के बारे में नहीं जाते है। लेकिन हिंदी कहानी और बच्चो के हिंदी कहानी से उन्हें बड़े आसानी के साथ सीख दिया जा सकता है।

मेहनत का फल- कहानी छोटे बच्चों के लिए

बहुत पुरानी बात है । एक बरगद के पेड़ पर एक कौआ रहता था । कौआ कामचोर था । उसने पेड़ पर अपना घोंसला बनाया । जल्दबाजी और कामचोरी के कारण उसका घोंसला मजबूत नही बना । कुछ दिनों बाद उस पेड़ पर रहने के लिए एक बया आई । बया बहुत मेहनती थी । वह अपना घोंसला उस पेड़ पर बनाने लगी।

वह कही दूर से सरकंडे की पतली सींक लाती थी और अपनी तेज चोंच से उसे चीर कर सावधानी से घोंसले में बनुती थी । इस तरह करते देखकर कौए ने उसका मजाक बनाया और बोला , ” इस तरह घोंसला बनाओगी तो सारी उम्र बीत जाएगी ।

“कौए की बात सुनकर बया ने बोला की ” भैया मेरी माँ ने मुझे लगन और मेहनत के साथ काम करने की सीख दी हैं । “
यह सुनकर कौआ बया पर हँसने लगा । बया ने कौए की बात को अनसुना कर दिया और अपना काम करती रही । अगले दिन जाकर उसका घोंसला पूरा हुआ । अब बया उसमें रहने लगी ।
दिन बीतने लगें ।

एक दिन बड़े जोर की आँधी आई । छोटे – छोटे पेड़ टूटकर गिर गए । कौए का घोंसला भी उड़कर बिखर गया । कौए ने पेड़ के कोटर में छिपकर अपनी जान बचाई । जब आँधी रूकी तो कौआ बया के घोंसले के पास गया ।

उसका घोंसला सही सलामत अपने स्थान पर मौजूद था । कौए को अब अपनी गलती का एहसास हुआ उसने बया से कहा , ” बया मैने मेहनत से जी चुराया और तुम्हारा मजाक उड़ाया , उसके लिए मुझे माफ कर देना । मै तुम्हारी सीख जीवनभर याद रखूगा ।

कहानी से सीख– हमें कभी मेहनत से जी नही चुराना चाहिए ।

2.सच्चा साथी

एक समय की बात है । एक जंगल में बहुत से पशु – पक्षी साथ – साथ रहते थे । उसी जंगल में एक पीपल के पेड़ पर बहुत से पक्षियों ने अपना घोंसला बना रखा था । वे सभी आपस में बड़े प्यार से मिलजुल कर रहते थे । मोर – मोरनी का एक जोड़ा भी उस पेड़ पर रहता था । पेड़ की कोटर में तोता – तोती का एक जोड़ा भी रहता था ।
एक दिन वर्षा ऋतु आते ही आसमान में काले – काले बादल छा गए और गरज – गरज कर शोर मचाने लगे ।

मोर काले बादलों को देखकर अपने पंखों को फैलाकर नाचने लगा । मस्ती में मोरनी भी फुदकने लगी । तभी मोर को तोते की घबराहट भरी रे रे सुनाई पड़ी । उसने नाचना छोड़कर ऊपर देखा । सभी पक्षी इधर – उधर शोर मचाते भाग रहे थे । तोता अब और भी भयभीत होकर टे – टें करने लगा । मोर को लगा तोता मुसीबत में है , वह उसे बुला रहा है । उसने सोचा – उसे तोते की मदद करनी चाहिए ।

मोर उड़कर ऊपर टहनी पर गया । मोर ने देखा- एक काला साँप तोते के कोटर की ओर बड़ रहा था ।साँप कोटर के समीप पहुँचने ही वाला था कि मोर साँप पर झपटा । उसने साँप की  पोछ अपनी चोंच से पकडी और नीचे आकर ज़मीन पर दे मारी ।

चोट से साँप की चीख निकल गई । वह गुस्से में मारने वाले की ओर पलटा किंतु सामने मोर को फिर से प्रहार के लिए तैयार देखकर डर गया ।

वह जान बचाकर तेजी से भागा और अपने बिल में घुस गया ।
तोते ने मोर को धन्यवाद दिया । सभी पक्षी आकर मोर की प्रशंसा करने लगे ।

कहानी से सीख– हमें मुसीबत के समय में सदैव एक – दूसरे की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए 

3. सफलता की राह कहानी 

कभी मीरा नाम की एक दूधवाली रहती थी। उसने अपनी गाय से दूध निकाला और दो बाल्टी दूध एक छड़ी पर लटकाकर बाजार में दूध बेचने के लिए निकल पड़ी।

जैसे ही वह बाजार की ओर जा रही थी, उसने सपना देखना शुरू कर दिया कि वह दूध से जो पैसे मिलेंगे, उसमें से वह क्या करेगी। उसने एक मुर्गी खरीदने और उसके अंडे बेचकर आमिर बनने की योजना बनाई।

वह एक केक, स्ट्रॉबेरी की एक टोकरी, एक फैंसी ड्रेस, और यहां तक कि एक नया घर खरीदने का सपना देखने लगी।

अपने उत्साह में, वह अपने साथ ले जा दूध के बारे में भूल गई। अचानक, उसने महसूस किया कि दूध नीचे गिर रहा था और जब उसने अपनी बाल्टी की जाँच की, तो वे खाली थे

कहानी से सिख 

अपने मुर्गियों के बच्चे पैदा करने से पहले उनकी गिनती न करें! केवल सफलता ही नहीं, सफलता प्राप्त करने की प्रक्रिया पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

4. सर्कस का हाथी कहानी 

एक बार एक सर्कस में, पांच हाथियों ने सर्कस की चाल चली। उन्हें कमजोर रस्सी से बांधकर रखा गया था जिससे वे आसानी से बच सकते थे, लेकिन नहीं बच पाए।

एक दिन सर्कस में जाने वाले एक व्यक्ति ने रिंग मास्टर से पूछा: “इन हाथियों ने रस्सी तोड़कर भाग क्यों नहीं लिया

रिंगमास्टर ने उत्तर दिया: “जब वे छोटे थे, तब से हाथियों को यह विश्वास दिलाया गया था कि वे रस्सियों को तोड़ने और भागने के लिए मजबूत नहीं हैं।”

इसी विश्वास की वजह से उन्होंने अब रस्सियों को तोड़ने की कोशिश तक नहीं की। समाज की मर्यादाओं के आगे न झुकें। विश्वास करें कि आप वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं जो आप चाहते हैं!

लड़का और भेड़िया की कहानी 

एक छोटा लड़का था, जिसके पिता, एक किसान, ने उसे हर दिन भेड़ों के झुंड को चराने के लिए कहा था। एक दिन, लड़का भेड़ों को देख कर बहुत ऊब गया था और इसलिए वह रोया: “भेड़िया! भेड़िया!”

उसकी चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण उसकी मदद के लिए दौड़ पड़े और भेड़िये को भगाया और भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाला।

जब उन्होंने मुस्कुराते हुए लड़के को देखा और महसूस किया कि वह अपने मनोरंजन के लिए भेड़िया भेड़िया चिल्ला रहा है, तो उन्होंने उसे डांटा!

अगले दिन, लड़का चिल्लाया कि भेड़िया वहाँ था। गांव वाले आए, उसे फिर डांटा और चले गए। उसी दिन बाद में, एक भेड़िया आया और भेड़ को पकड़ कर ले गया।

लड़का फिर चिल्लाया, “भेड़िया! भेड़िया! कृपया मेरी मदद करें।” लेकिन, ग्रामीणों ने मान लिया कि वह फिर से मूर्खतापूर्ण शरारत कर रहा है और उसके बचाव में कोई नहीं आया। 

कहानी से सिख

झूठ मत बोलो या मूर्खतापूर्ण मज़ाक मत करो, क्योंकि कोई भी झूठ बोलने वाले पर विश्वास नहीं करेगा, भले ही वह सच कह रहा हो!