Crane bird in hindi

सारस पक्षी की जानकारी

सारस पक्षी के बारे में जानकारी Crane Bird In Hindi इस आर्टिकल में बताई गयी है। सारस पक्षी एक खूबसूरत और बड़ा पक्षी है। यह पूरी दुनिया के तालाबो, नदियों, झीलों के पास पाया जाता है। यह पक्षी हमेशा जोड़ा बनाकर रहता है। एक बार जोड़ा टूटने पर यह वापस कभी भी जोड़ा नही बनाता है।

1. सारस Crane पक्षी की टांगे बहुत लंबी होती है। इसके 2 टांगे होती है। टांगो का रंग हल्का गुलाबी होता है।

2. इस पक्षी की गर्दन भी इनकी टांगो की तरह ही लम्बी होती है। गर्दन घुमावदार होती है और दिखने में बेहद सुंदर लगती है।

3. सारस की चोंच भी बड़ी और लम्बी होती है। इसी चोंच के सहारे सारस भोजन को निगल जाते है।

4. सारस Crane पक्षी का वजन 6 से 7 kg के आसपास होता है। यह खड़े होने पर 5 से 6 फुट तक लम्बा होता है।

5. दुनिया का सबसे भारी सारस पक्षी Red Crowned Crane है। सबसे बड़ा पक्षी Sarus Crane है।

6. सारस एक प्रवासी पक्षी है जो एक जगह से दूसरी जगह जाते आते रहते है। कुछ प्रजाति के सारस एक ही जगह अपना जीवन व्यतीत करते है।

7. भारत मे सबसे ज्यादा साइबेरियन सारस पाये जाते है। ये पक्षी साइबेरिया से लंबा रास्ता तय करके भारत आते है। अक्टूबर माह में ये भारत मे प्रवास करते है।

8. सारस Crane पक्षी गहरे पानी मे नही जाते है। ये कम पानी मे रहकर ही भोजन तलाश करते है।

9. सारस दुनिया का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। सारस पक्षी आपस में वार्तालाप करने के लिए अलग अलग तरह की आवाजें निकालते है।

10. सारस पक्षी का औसत जीवनकाल 15 से 18 वर्ष तक होता है।

11. सारस वेसे तो शाकाहारी पक्षी है और पेड़पौधों, बीजो को खाते है लेकिन कभी कभार छोटी मछलियों को भी खा जाते है।

12. सारस पक्षी को प्रेम का प्रतीक कहा जाता है। सारस जीवनभर एक ही साथी के साथ रहता है। जब उसके साथी की मृत्यु हो जाती है, तब यह उसके वियोग में खाना पीना त्याग देता है। अंत मे उसकी भी मृत्यु हो जाती है।

13. नर और मादा सारस में अंतर कर पाना मुश्किल होता है क्योंकि ये बिल्कुल एक जैसे दिखते है। मादा का आकार नर के मुकाबले छोटा होता है।

14. मादा सारस एक बार मे ज्यादातर 2 अंडे देती है। करीब 1 महीने के बाद इन अंडों से बच्चे निकलते है। अंडों की देखरेख का जिम्मा नर सारस पर होता है।

15. सारस पक्षी Crane Bird आसमान में करीब 40 हजार फ़ीट ऊपर तक उड़ते है।

16. सारस पक्षी वर्तमान में विलुप्ति के कगार पर है। दुनिया के कई देशों से यह पूर्णतया खत्म हो चुका है। भारत मे भी इनकी संख्या में कमी आयी है। इसका मुख्य कारण जलवायु में परिवर्तन और शिकार है।

वाइल्ड बर्ड वाचर एवं वन्यजीव प्राणी संरक्षण से जुड़ी जागृति संस्था के अध्यक्ष प्रभात भट्टी का कहना है कि ऊना जिला में स्वां नदी के मुहानों पर दो तीन दशक पूर्व लगभग साईबेरियन सारस के लगभग 18-20 जोड़े रहा करते थे। मगर चिंता का विषय है कि स्वां नदी में अवैध खनन के चलते और प्राकृतिक जलाशयों के सिकुड़ने से सारस इस क्षेत्र से भी विलुप्त होते जा रहे है।