English ka pita kaun hai

भारत देश मे अंग्रेजी भाषा को एक विशेष महत्व दिया जाता है। अंग्रेजी बोलने तथा समझने वाले लोगो को समाज एक दूसरे लिहाजे से देखता है एवं उनको अन्य लोगो से बेहतर मानता है। गुलामी के समय से ही भारत मे अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व रहा है। वर्तमान में दिन- ब – दिन बढ़ रहे इसके प्रभाव ने लोगो को अपनी तरफ और भी ज्यादा आकर्षित किया है। देश का प्रत्येक नागरिक अपनी मातृभाषा के साथ साथ अंग्रेजी भाषा को जानना, सीखना तथा समझना चाहता है।

लंबे समय तक अंग्रेजो कि गुलामी करने के दौरान उनके द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग ने लोगो के मन मे यह अवधारणा बना दी है कि, की अंग्रेजी भाषा के जनक अंग्रेज़ है। इसमें कितनी सच्चाई है, इसका ज्ञान बहुत कम लोगो को है। आज के इस article में हम इसी भाषा के जनक के बारे में जानेंगे, जिसको सीखने के लिए लोगो मे इतनी ललक है।लंबे समय तक अंग्रेजो कि गुलामी करने के दौरान उनके द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग ने लोगो के मन मे यह अवधारणा बना दी है कि, की अंग्रेजी भाषा के जनक अंग्रेज़ है। इसमें कितनी सच्चाई है, इसका ज्ञान बहुत कम लोगो को है। आज के इस article में हम इसी भाषा के जनक के बारे में जानेंगे, जिसको सीखने के लिए लोगो मे इतनी ललक है।

अंग्रेजी के जनक का नाम क्या हैअंग्रेजी भाषा के जनक शेक्सपियर तथा जेफ्री चौसर को माना जाता है। शेक्सपियर का इस इस भाषा को एक नया रूप देने के लिए जाना जाता है, परंतु जेफ्री चौसर को “अंग्रेजी साहित्य का पिता ” कहा जाता है। इसलिए चौसर का दर्जा इस रूप में शेक्सपियर से ज्यादा मुख्य एवं अहम माना जाता हैअंग्रेजी के जनक “जेफ्री चौसर” (Geoffrey Choucer) का जीवन परिचयजेफ्री चौसर एक महान लेखक तथा दार्शनिक थे। जिनका जन्म 1343 शताब्दी के करीब इंग्लैंड के लंदन शहर में हुआ था। इनका परिवार बुर्जुआ वर्ग मे आता था। उनके पिता जॉन चौसर शराब का व्यवसाय चलाते थे। उनकी माता का नाम Agnes De Copton था।जेफ्री की अपने शुरुआती सालो मे सेंट पॉल कैथेड्रल स्कूल में प्रवेश लिया। जहाँ उन्होंने पहली बार विर्जिल तथा ओविद जैसे महान लेखकों का लेखन देखा। जिसके वह प्रभावित हुये एवं उनके मन मे लेखन के प्रति विचार जागे। 1357 में वह क्लैरेन्स की पत्नी एलिस्टर की काउंटेस एलिजाबेथ के लिये एक शाही नौकर बन गये। 1359 मे चौसर को फ्रांस में भेज दिया गया। इस दौरान एक फिरौती में इनको पकड़ लिया गया। शाही नौकर होने के कारण वहां के राजा एडवर्ड ||| ने उनको रिहाई दिलवा दी।

इसके बाद 1366 में चौसर की शादी फिलिप पेनेट से हो गई। उनके दो बच्चे हुये जिनके नाम एलिज़ाबेथ तथा थॉमस थे। 1387 मे अपनी पत्नी की मौत हो जाने के बाद चौसर ने शाही कार्यो मे हिस्सा लेना बंद कर दिया जिसके परिणामस्वरूप उनको आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उनने अपने लेखन को और भी ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया एवं एक से एक महान कृतियों लिखी जो इंग्लिश भाषा के इतिहास में आज भी अमर है, उनकी कुछ कृतिया तथा कविताओं के संग्रह निम्न थे –कैंटरबरी की कहानियांडचस की किताबहाउस ऑफ फेमफूल्स का विलोपनफार्च्यून“Gentilesse”ट्रिलस और क्रिसडेडइस महान हस्ती का निधन इंग्लैंड के लंदन शहर में ही 25 अक्टूबर 1400 को हो गया था। 60 साल की उम्र में हुई इनकी मौत के कारण अज्ञात बताये जाते है। चौसर को वेस्टमिंस्टर एब्बे मे दफनाया गया। जिसको बाद में ” ग्रेविस्टोन कवि का कार्नर” कहा जाने लगा।