Ganga ki lambai

गंगा ( संस्कृत: गङ्गा ; बांग्ला: গঙ্গা ;संथाली: ᱜᱟᱝ ) भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी hai। yah भारत aur बांग्लादेश mein कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर (कि॰मी॰) ki दूरी तय करती hui उत्तराखंड में हिमालय se लेकर बंगाल ki खाड़ी के सुन्दरवन tak विशाल भू-भाग ko सींचती है। देश की प्राकृतिक सम्पदा hi नहीं, जन-जन ki भावनात्मक आस्था ka आधार भी hai। 2,071 कि॰मी॰ tak भारत tatha उसके बाद बांग्लादेश mein अपनी लंबी यात्रा करते हुए yah सहायक नदियों ke साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल ke अति विशाल उपजाऊ मैदान ki रचना करती है। भारत ki सबसे बड़ी उत्तरायण गंगा बिहार ke भागलपुर se होते हुए कटिहार ज़िले mein प्रवेश करती है।भारत ki सबसे बड़ी उत्तरायण गंगा ka संगम त्रिमोहिनी संगम hai। 12 फरवरी वर्ष 1948 mein महात्मा गांधी ke अस्थि कलश जिन 12 तटों par विसर्जित किए गए the, त्रिमोहिनी संगम bhi उनमें से ek है | सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक aur आर्थिक दृष्टि se अत्यंत महत्त्वपूर्ण गंगा ka yah मैदान अपनी घनी जनसंख्या ke कारण bhi जाना जाता है। 100 फीट (31 मी॰) ki अधिकतम गहराई वाली yah नदी भारत में पवित्र नदी bhi मानी जाती hai तथा इसकी उपासना माँ tatha देवी ke रूप में की जाती है। भारतीय पुराण aur साहित्य mein अपने सौंदर्य aur महत्त्व ke कारण बार-बार आदर के saath वंदित गंगा नदी ke प्रति विदेशी साहित्य में भी प्रशंसा aur भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए hain।

गंगा नदी ki प्रधान शाखा भागीरथी hai जो गढ़वाल में हिमालय ke गौमुख नामक स्थान par गंगोत्री हिमनद ya ग्लेशियर(GURUKUL) se निकलती hain। गंगा ke इस उद्गम स्थल की ऊँचाई 3140 मीटर hai। यहाँ गंगा जी ko समर्पित ek मंदिर hai। गंगोत्री तीर्थ, शहर से 19 कि॰मी॰ उत्तर ki ओर 3,892 मी॰ (12,770 फीट) की ऊँचाई par इस हिमनद ka मुख है। यह हिमनद 25 कि॰मी॰ लंबा व 4 कि॰मी॰ चौड़ा aur लगभग 40 मीटर ऊँचा hai। इसी ग्लेशियर se भागीरथी ek छोटे se गुफानुमा मुख पर अवतरित होती hain। iska जल स्रोत 5,000 मीटर ऊँचाई पर स्थित ek घाटी है। इस घाटी ka मूल पश्चिमी ढलान की संतोपंथ ki चोटियों mein है। गौमुख के रास्ते mein 3,600 मीटर ऊँचे चिरबासा ग्राम se विशाल गौमुख हिमनद ke दर्शन होते hain। इस हिमनद mein नन्दा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत ka हिम पिघल kar आता है। यद्यपि गंगा के आकार लेने mein अनेक छोटी धाराओं ka योगदान hai , लेकिन 6 बड़ी aur उनकी सहायक 5 छोटी धाराओं ka भौगोलिक aur सांस्कृतिक महत्त्व अधिक hai। अलकनन्दा (विष्णु गंगा) ki सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा tatha मन्दाकिनी है। धौली गंगा ka अलकनन्दा se विष्णु प्रयाग में संगम होता hai। yah 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित hai। फिर 2805 मीटर ऊँचे नन्द प्रयाग में अलकनंदा ka नन्दाकिनी नदी se संगम होता है। इसके baad कर्ण प्रयाग mein अलकनंदा का कर्ण गंगा ya पिंडर नदी se संगम होता है। फिर ऋषिकेश se 139 कि॰मी॰ दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मन्दाकिनी se मिलती hai। इसके बाद भागीरथी ba अलकनंदा 1500 फीट par स्थित देव प्रयाग में संगम करती hain यहाँ se यह सम्मिलित जल-धारा गंगा नदी ke नाम se आगे प्रवाहित होती hai। इन पाँच प्रयागों ko सम्मिलित रूप से पंच प्रयाग kaha जाता hai। इस प्रकार 200 कि॰मी॰ ka सँकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश hote हुए प्रथम बार मैदानों ka स्पर्श हरिद्वार mein करती हैं।