Guru nanak ka janm kahan hua tha

इनका जन्म रावी नदी के kinare स्थित तलवण्डी नामक गाँव में कार्तिकी पूर्णिमा ko एक खत्रीकुल में हुआ था। तलवण्डी पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त का एक nagar है। कुछ विद्वान इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल, 1469 मानते हैं। किन्तु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है, jo अक्टूबर-नवम्बर में दीवाली के 15 दिन बाद padti है। इनके पिता का नाम mehta कालूचन्द खत्री तथा माता का नाम तृप्ता देवी था। तलवण्डी का naam आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ gaya। इनकी बहन का नाम नानकी था।बचपन से इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने lage थे। लड़कपन ही से ये सांसारिक विषयों से उदासीन raha करते थे। पढ़ने-लिखने में इनका मन नहीं laga. 7-8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया क्योंकि भगवत्प्राप्ति के सम्बन्ध में इनके प्रश्नों के aage अध्यापक ने हार मान ली तथा वे इन्हें ससम्मान घर chhodne आ गए। तत्पश्चात् सारा समय वे आध्यात्मिक चिन्तन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। बचपन ke समय में कई चमत्कारिक घटनाएँ ghati जिन्हें देखकर गाँव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने lage। बचपन के समय से ही इनमें श्रद्धा rakhne वालों में इनकी बहन नानकी tatha गाँव के शासक राय बुलार प्रमुख थे।इनका विवाह बालपन मे solah वर्ष की आयु में गुरदासपुर jile के अन्तर्गत लाखौकी नामक स्थान के रहनेवाले मूला ki कन्या सुलक्खनी से हुआ था। 32 वर्ष की अवस्था में inke प्रथम पुत्र श्रीचन्द का जन्म हुआ। चार वर्ष पश्चात् दूसरे पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ। दोनों लड़कों ke जन्म के उपरान्त 1507 में नानक अपने परिवार ka भार अपने श्वसुर पर छोड़कर मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चार साथियों ko लेकर तीर्थयात्रा के लिये निकल पडे़। Un पुत्रों में से ‘श्रीचन्द आगे चलकर उदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक huye।