Himachal pradesh ki rajdhani kaun si hai

भारत के राज्य और उनकी राजधानियां. हर हिंदुस्तानी के बचपन का कुछ न कुछ हिस्सा ये सब रटने में ज़रूर ज़ाया होता है. जीके की किताब में मैच द फॉलोविंग होता है. उसमें राज्य से उसकी राजधानी तक लकीर खींचते हैं. या क्विज़ होती है, जिसमें एक रो के बच्चे दूसरी रो के बच्चों से होड़ लगाते हैं. ये आसान चीज़ें अब कॉम्पलिकेट होने जा रही हैं.

क्या है कि 1971 में जब से हिमाचल प्रदेश एक राज्य बना, तब से अब तक एक राजधानी थी – शिमला. माने रैपिड फायर में पूछा जाए तो तड़ाक से शिमला बोले और आगे बढ़े. लेकिन अब जवाब देने से पहले काउंटर क्वेश्चन करना पड़ेगा. वक्त खराब होगा. क्योंकि 19 जनवरी 2017 से हिमाचल प्रदेश की दो राजधानियां हो गई हैं. एक शिमला और दूसरी धरमशाला. राज्य के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अचानक ये घोषणा कर दी. अचानक इसलिए कहा क्योंकि अभी तक कोई सुगबुगाहट नहीं थी.

हिमाचल प्रदेश में साल के अंत तक चुनाव आने वाले हैं. अब ऐसा है कि राज्य की 68 में से 25 विधानसभा सीटें कांगड़ा, ऊना और हमीरपुर में हैं. इन इलाकों के लिए धरमशाला का राजधानी बनना काफी मायने रखता है. इन्हें अब अपने कामों के लिए दूर शिमला तक नहीं जाना पड़ेगा. तो मुख्यमंत्री जी की घोषणा अचानक भले आई हो, पर की सोच-समझ कर ही गई है.

मल्टिपल राजधानियांः

कोई जगह राजधानी इसलिए नहीं कहलाती कि वहां ढेर सारे सरकारी दफ्तर होते हैं. गेम ऑफ थ्रोन्स के दूसरे सीज़न में वॅरिस टिरियन से कहता है कि ताकत वहां बसती है जहां लोग मानते हैं कि वो बसती है. राजधानियों के बारे में भी यही बात है. राजधानियां ताकत का प्रतीक होती हैं और इसीलिए ताकत का केंद्र भी. हिमाचल में अब ऐसे दो केंद्र हो गए हैं. लेकिन हिमाचल प्रदेश अकेला नहीं है जिसकी एक से ज़्यादा राजधानियां हैं. दुनिया में कई देश हैं जिनकी एक से ज़्यादा राजधानियां हैं. एक नज़रः

इस देश की एक नहीं, दो नहीं, तीन राजधानियां हैं. केपटाउन विधाई राजधानी है, माने लेजिस्लेटिव कैपिटल. यहां साउथ-अफ्रीका की संसद है. यहीं सारे कानून बनाए जाते हैं. प्रिटोरिया प्रशासनिक राजधानी है, माने एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल. यहां से सरकारी अफसर काम-काज चलाते हैं. तीसरी राजधानी ब्लोएम्फोन्टीन है. ये न्यायिक राजधानी है. यहां साउथ-अफ्रीका की सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील है – वहां की सबसे बड़ी अदालत.

ये देश जेरुशेलम को अपनी राजधानी मानता है. ये शहर यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों तीनों के लिए बड़ा महत्व रखता है. इसलिए इस शहर को लेकर खूब लड़ाइयां हुई हैं. इज़राइल ज़ोर देता है कि जेरुशेलम पर उसका हक है लेकिन उसका दावा कई देश और खासतौर पर फिलिस्तीनी लोग नहीं मानते. इसलिए दुनिया के लगभग सभी देशों के दूतावास जेरुशेलम की जगह तेल-अवीव में हैं. तो दुनिया के देश इज़राइल से तेल-अवीव के ज़रिए ही बात करते हैं. इज़राइल का अपना भी ढेर सा तामझाम तेल-अवीव में ही है.

यहां भी दो राजधानियां हैं. जी हां. सियोल ऑफिशियल राजधानी ज़रूर है, लेकिन ऐसा लगने लगा था कि सियोल का दबदबा कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है. इसलिए इसे बैलेंस करने के लिए कुछ दफ्तर सेजोंग सिटी शिफ्ट कर दिए गए हैं. सेजोंग सिटी साउथ कोरिया की प्रशासनिक राजधानी है.

ये तीन बड़े उदाहरण हैं. इनके अलावा कई देश हैं, जहां आधिकारिक राजधानी भले ही कोई एक शहर कहलाता हो, लेकिन सरकार की सारी ताकत माने सारे ज़रूरी दफ्तर वहीं पर नहीं होते. जैसे जर्मनी और नेदरलेंड्स में है. अपने यहां जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और कभी-कभी हिमाचल प्रदेश के साल में एक विधानसभा सत्र उनकी राजधानी से बाहर होते हैं.

ऐसे भी होता है कि देश की बसाई हुई राजधानी किसी शहर के पास बसाई गई और नाम भी रखा गया. लेकिन उस शहर की अपनी अलग पहचान नहीं बनी. वो फेमस नहीं हुआ. जैसे श्रीलंका की प्रशासनिक राजधानी श्री जयवर्धन कोट्टे. ये कोलंबो के पास ही बसा इलाका है. जैसे अपने यहां असम की राजधानी दिसपुर है. ये गुवाहाटी में एक इलाका है, इसलिए कई लोग गुवाहाटी को असम की राजधानी बोल जाते है.

जाते-जाते ये भी ज्ञान ले लीजिए कि देहरादून भी उत्तराखंड की पक्की राजधानी नहीं है. टेम्परेरी है. तभी तक के लिए जब तक चमोली के गैरसेन में नई राजधानी बन कर तैयार नहीं हो जाती.