Hindi ke aadi kavi kaun hai

ऋषि कवि वाल्मीकि जी की यह कविता ही पहली कविता है। एक बार ऋषि वाल्मीकि पक्षियों के कलरव निहार रहे थे। क्रौंच पक्षियों की अठखेलियां, उनका कूजन और कलरव देखते-देखते वे उनकी क्रीड़ाओं में में वे इतने खो गए कि उन्हें समय का भान ही नहीं रहा कि तभी एक ब्याध ने रति क्रिया में निमग्न क्रौंच के एक जोड़े को अपने तीर से बेध दिया।