Nagaland bharat ka vidhivat rajya kab bana

भरपूर प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पूर्व का स्विटजरलैंड (Switzerland of East) कहलाना वाले नगालैंड (Nagaland) राज्य के बारे में देश के ज्यादातर लोग कम ही जानते हैं. पर्यटन के मामले में भी ये उत्तर-पूर्व के दूसरे राज्यों से कुछ पीछे ही है. इसकी एक वजह यहां इनर लाइन परमिट का होना है, जो एक तरह से देश के भीतर ही आंतरिक वीजा की तरह काम करता है.

जनजातियों का ये राज्य हमेशा से ही अपनी अलग पहचान को लेकर काफी सचेत रहा. यहां तक कि साल 1929 में साइमन कमीशन के सामने भी नगाओं ने अपनी अलग पहचान की बात की थी. ये मांग भीतर ही भीतर सिर उठाती रही और देश की आजादी के समय ही नगाओं ने भी नगालैंड को आजाद घोषित कर दिया. नगा नेशनल काउंसिल की इसमें बड़ी भूमिका थी.

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हालांकि अब भी यहां अलगाववादी ताकतें पल रही हैं, जो देश के आंतरिक नक्शे में कई बदलाव चाहती हैं. लेकिन इसके बाद भी नगा जनजाति देश का अभिन्न हिस्सा हो चुकी है. यहां कुल 16 बड़ी जनजातियां हैं, जिनकी मान्यताएं और परंपरा एक-दूसरे से एकदम अलग हैं, फिर बाकी देश की तो बात ही क्या कहें. नगालैंड में ज्यादातर लोग ईसाई धर्म के मानने वाले हैं. इसके बाद ज्यादातर लोग हिन्दू और इस्लाम धर्म के मानने वाले रहते हैं.

इस राज्य में प्रवेश और घूमने के लिए पर्यटकों को एक खास परमिट जारी होता है, जिसे Inner Line Permit कहते हैं. ये परमिट सैलानियों को एक निश्चित अवधि के लिए अपने राज्य में रहने की इजाजत देता है. आमतौर पर ये अवधि अधिकतम 90 दिनों की होती है. इसके बाद परमिट को वैध कारणों के साथ रिन्यू करवाया जा सकता है.

बीच-बीच में इनर लाइन परमिट पर भी काफी विवाद होता रहता है. जैसे नगा जनजातियों को बाहरी संस्कृति से बचाने के लिए इस परमिट की अनुमित मिली थी. हालांकि अब नगालैंड में जनजातीय संस्कृति की जगह ईसाई संस्कृति आ चुकी है. ऐसे में बहुत से लोग परमिट को गैर-जरूरी मानते हैं और इसे खत्म करने की बात करते हैं.

देश के दूसरे हिस्सों की तरह आने-जाने में उतना सुगम न होने के कारण ये राज्य कई अलग तरह की बातों के कारण चर्चा में आता रहता है. जैसे इसी साल जुलाई में यहां डॉग मीट पर प्रतिबंध लगाया गया. ये कदम एक वीडियो वायरल होने के बाद जांच के बाद लिया गया, जिसमें कुत्तों को बेरहमी से मारा जा रहा था. बता दें कि डॉग मीट नगालैंड के कई समुदायों का पसंदीदा आहार है.

नगालैंड के कुछ समुदाय दवाओं में कुत्ते के मांस का इस्तेमाल करते हैं. इससे पहले मार्च महीने में मिजोरम में भी कुत्तों के मीट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. अब गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा शाखा ने ये पाबंदी हटा ली है. पाबंदी के दौरान लोगों ने कोर्ट के फैसले को खान-पान के अधिकार में हस्तक्षेप मानते हुए खासा विरोध किया था.