Nari ke upar kavita

नारी शक्ति पर कविता इन हिंदी। Poem On Nari Shakti In Hindiशीर्षक – वो इक नारी है वो घर से निकलती हैनया इक माकाम बनाती हैवो घर आ कर अपनी भूमिका भीखूब निभाती हैवो इक नारी है , वो इक नारी है ।माँ बनकर ममता की बौछार लगाती हैपत्नी बनकर सुख – दुःख में साथ निभाती हैबहन बनकर कितना स्नेह लुटाती हैहर रूप में लगती प्यारी हैवो इक नारी है , वो इक नारी है ।कहने को तो वो है बहुत महाननारी है नर की खानफिर भी मिलता नहीं उसकोउसका उचित स्थानआओ हम सब मिलकर नारी का सम्मान करें”उस पर गर्व करें आभिमान करेंउस पर गर्व करें आभिमान करें “- रश्मि शुक्ल रीवा (म.प्र)नरी पर कविता Nari Shakti Kavitaशीर्षक – नारी : अबला नहीं सबलाकोमल है कमजोर नहीं अब साबित कर दिखाना हैआजादी की नींव खोदकरप्रगति का पत्थर लगाना हैदया और माया की मूरतजब बनती महतारी हैरौद्र रूप कर लेती धारणगर सामने अत्याचारी हैअपने साहस के दम पर अब नवल इतिहास बनाना हैबेङियों को तोङकर बस आगे कदम बढ़ाना है।- दीपाली गुप्ताNari shakti Poem नारी शक्ति पर पोएमक्षीण नहीं,अबला नहीं,ना ही वह बेचारी है,जोश भरा लिबास पहने,गर्व से चलती,आज की नारी है।त्याग की सूरत,ममता की मूरत,तो कभी देवी का प्रतिरूप कही,जैसी जिसने मांग करी,वह ढलती उसके स्वरूप रही।आजादी के सफर में,अबतंग गलियों का रुख मोड़ रही है,प्रतिबंध की दीवारों को,हौसलों के हथौड़े से वह तोड़ रही है।लड़की हो,तुमसे नहीं होगा,यह बातें अब सारी धुआं है,ऐसा कोई क्षेत्र बता दो, जिसमें,नारी ने बुलंदियों को नहीं छुआ है।योद्धा बनी वह हर परिस्थिति में,उसके होने से जीवन में जान है,झंकार है उसकी पायल से,नहीं तो आंगन सूना और वीरान है।।- कीर्ति