Sanskriti ke prakar

गिलिन तथा जे.पी. ने एक सामाजिक समूह के सीखे हुए व्यवहार को संस्कृति कहा है। इस प्रकार संस्कृति के अन्तर्गत वह सब कुछ सम्मिलित है जो कुछ मनुष्य समाज में सीखता है, जैसे-ज्ञान-धार्मिक, विश्वास, कला, कानून, नैतिकता, रीति-रिवाज, व्यवहार के तौर-तरीके, साहित्य, संगीत तथा भाषा आदि। संस्कृति दो प्रकार की हो सकती है : (1) भौतिक संस्कृति, तथा (2) अभौतिकसंस्कृति।