There ka matlab

प्रोत्साहन: प्रोत्साहन संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. उत्साह बढ़ाने की क्रिया या भाव ; हिम्मत बँधाना 2. उत्साह बढ़ाने वाली बात 3. उत्तेजित करना ; उकसाना ; बढ़ा‌वा।प्रोत्साहन: पुलिंग – हिम्मत बढ़ाना ;प्रोत्साहन: पुलिंग – प्रोत्साहित करने के लिए कही जाने वाली बात।प्रोत्साहन: प्रोत्साहन – संज्ञा पुलिंग [संस्कृत] [विशेषण प्रोत्साहित] खूब उत्साह बढ़ाना । हिम्मत बँधाना । उत्तेजित करना ।परे: परे संस्कृत [अव्यय] 1. अलग ; इतर 2. और आगे ; बहुत दूर ; उस पार ; वहाँ 3. ऊर्ध्व ; ऊपर 4. पहुँच से दूर या आगे ; कहीं और 5. बाद ; बाहर 6. किसी प्रकार की हद या सीमा के पार।परे: परे- अव्य० [संस्कृत पर] 1. दूर । उस ओर । उधर । 2. अतीत । बाहर । अलग । जैसे,- ब्रह्म जगत् से परे है । क्रिया प्र०-करना ।-रहना ।-होना । 3. ऊपर । ऊँचे । बढ़कर । उत्तर । 4. बाद । पीछे । मुहावरा- परे परे करना = दूर हटाना । हट जाने के लिये कहना । परे बैठाना = मात करना । बाजी लेना । तुच्छ या छोटा साबित करना । जैसे,-उसने ऐसा भोजन पकाया कि रसीइए की भी परे बिठा दिया ।उधर: उधर [क्रिया विशेषण] 1. उस ओर ; उस तरफ़ 2. उस पक्ष में 3. ‘इधर’ का विलोम।उधर: उधर- क्रिया विशेषण [ संस्कृत उतर अथवा पुलिंग हिंदी ऊ (वह)+घर (प्रत्यय संस्कृत त्रल्)] उस और । उस तरफ । दूसरी तरफ । जैसे,-उधर भूलकर भी मत जाना ।उधर : अव्य० [संज्ञा शब्द – उत्तर अथवा पुल्लिंग हिंदी शब्द – ऊ (वह)+धर(प्रत्य)] 1. उस तरफ जिधर वक्ता ने संकेत किया हो। वक्ता के विपक्ष में या सामने की ओर, कुछ दूरी पर। 2. पर पक्ष की ओर या उसके आस-पास। ‘इधर’ का विपर्याय।उधर : अव्य० [संज्ञा शब्द – उत्तर अथवा पुल्लिंग हिंदी शब्द – ऊ (वह)+धर(प्रत्य)] 1. उस तरफ जिधर वक्ता ने संकेत किया हो। वक्ता के विपक्ष में या सामने की ओर, कुछ दूरी पर। 2. पर पक्ष की ओर या उसके आस-पास। ‘इधर’ का विपर्याय।वहाँ: वहाँ संस्कृत [अव्यय] 1. उस स्थान पर ; उस जगह पर 2. उस अवसर, बिंदु या स्थिति पर।वहाँ: अव्यय – उस स्थान में, उस जगह।वहा: वहा 2 – विशेषण स्त्रीलिंग वहन या धारण करनेवाली । जैसे, स्त्रोतोवहा ।वहाँ: वहाँ – अव्य० [हिंदी वह] उस जगह । उस स्थान पर । उहाँ । विशेष – जैसे ‘यहाँ’ का प्रयोग पास के स्थान के लिये होता है, वैसे ही इस शब्द का प्रयोग दूर के स्थान के लिये होता है ।वहा: वहा 1 – संज्ञा स्त्रीलिंग [संस्कृत] नदी । स्त्रोतस्विनी [को कहते हैं] ।उत : क्रिया विशेषण शब्द – [हिंदी शब्द – उ+त (स्थानवाचक)] उस दिशा में। उस ओर। उधर।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)उत : क्रिया विशेषण शब्द – [हिंदी शब्द – उ+त (स्थानवाचक)] उस दिशा में। उस ओर। उधर।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)उतन : अव्य० [हिंदी शब्द – उ+तनु] उस दिशा में। उस ओर। उधर।उतन : अव्य० [हिंदी शब्द – उ+तनु] उस दिशा में। उस ओर। उधर।