Vidur ki patni ka naam kya tha

महाभारत में #विदुर एक मुख्य पात्रों में से एक हैं। वे कुरुवंश के प्रधानमंत्री और पांडवों एवं कौरवों के अंकल भी थे। आओ जानते हैं उनका संक्षिप्त परिचय।
महत्व : विदुर ऋषि व्यास के पुत्र थे। विदुर पांडवों के सलाहकार थे और उन्होंने दुर्योधन द्वारा रची गई साजिश से कई मौके पर उन्हें मृत्यु से बचाया था। विदुर ने कौरवों के दरबार में द्रौपदी के अपमान का विरोध किया था। #कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान विदुर धर्म और पांडवों के पक्ष में थे।
  भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, विदुर को यम (धर्म) का अवतार माना जाता था। कृष्ण ने विदुर के ज्ञान और लोगों के कल्याण के प्रति उनके समर्पण का सम्मान किया। जब भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के शांतिदूत के रूप में हस्तिनापुर आए, तो वे विदुर के घर पर रुके, क्योंकि कृष्ण जानते थे कि विदुर ठीक से उनके महल में उनकी देखभाल करेंगे।

कुरुक्षेत्र युद्ध के विरोध में विदुर ने मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। विदुर अपनी वृद्धावस्था में एक संत के रूप में अपने सौतेले भाई धृतराष्ट्र और अपनी भाभियों गांधारी और कुंती के साथ जंगलों में चले गए थे। अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने युधिष्ठिर को अपनी शक्ति देते हुए कहा कि वे दोनों भगवान यम धर्मराज के अवतार थे।4

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दरवाजे पर आते ही श्री कृष्ण ने आवाज लगायी। फिर क्या था, श्री कृष्ण की मोहक आवाज सुनते ही विदुर जी की धर्मपत्नी सुध बुध खो बैठी। भक्ति में लीन वह जिस अवस्था में थी वैसे ही कृष्ण के स्वागत में द्वार पर आ गई।

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भगवान श्री कृष्ण ने भक्ति में लीन विदुर जी की पत्नी को देखकर अपना पितंबर झट से उनके ऊपर डाल दिया। इसके बाद विदुर जी की पत्नी को होश आया और वह लज्जित हो गई।

फिर से सुध बुध गवांकर कर बैठी यह गलती
कुछ समय बाद कृष्ण की भक्ति में लीन विदुर की पत्नी ने फिर से दूसरी गलती कर दी। भगवान को केला खिलाने बैठी तो केला नीचे फेंकने लगी और श्री कृष्ण को छिलके खिलाने लगी।

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भगवान भक्त की भावना देखते हैं सो उन्होंने भी कुछ नहीं कहा और चुपचाप केले के छिलके खाते गए जैसे भगवान राम ने सबरी के जूठे बेर खाए थे। जब विदुर जी ने यह लीला देखी तो दौरे-दौरे आए और स्वयं अपने हाथों को श्री कृष्ण को केला खिलाकर पत्नी के किए गलती की क्षमा मांगने लगे।