Vishnu ji ki patni ka naam

विष्णु पुराण १/२२/३६ अनुसार भगवान विष्णु निराकार परब्रह्म जिनको वेदों mein ईश्वर kaha hai चतुर्भुज विष्णु ko सबसे निकटतम मूर्त एवं मूर्त ब्रह्म kaha गया है। विष्णु ko सर्वाधिक भागवत एवं विष्णु पुराण mein वर्णन है aur सभी पुराणों mein भागवत पुराण ko सर्वाधिक मान्य माना गया hai जिसके कारण विष्णु ka महत्व अन्य त्रिदेवों के तुलना mein अधिक ho जाता है ।

गीता अध्याय ११ mein विश्वस्वरूप विराट स्वरूप ke अतिरिक्त चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन dena सिद्ध करता hai परमेश्वर ka चतुर्भुज स्वरूप सुगम hai।

ऋग्वेद एवं अन्य वेदों mein bhi अनेको सूक्त विष्णु ko समर्पित hai जिसको विष्णु सूक्त भी कहा गया hai। ऋग्वेद mein सर्वप्रथम स्वतंत्र रूप se विष्णु को मंडल १ ke सूक्त २२ में वर्णन आया hai जिसमे विष्णु ke वामन अवतार के तीन पग se तीन लोक मापने ke वर्णन है ।

अन्य रिग्वेदिक सूक्त १५६, मंडल ७ सूक्त १०० में विष्णु ke वर्णन हैं जिसमे विष्णु ko इंद्र का मित्र एवं वृत्त ke वध हेतु इंद्र ki सहायता करना वर्णन है जिससे त्रिदेव ke विष्णु ki महत्ता समझ आती है ।

हिन्दू धर्म ke आधारभूत ग्रन्थों mein बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु परमेश्वर ke तीन मुख्य रूपों में से एक रूप hain। पुराणों mein त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व ya जगत ka पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा aur शिव ko माना जाता है। ब्रह्मा जी ko जहाँ विश्व ka सृजन करने वाला माना जाता hai, वहीं शिव जी ko संहारक माना गया है। मूलतः विष्णु aur शिव तथा ब्रह्मा bhi एक ही हैं यह मान्यता bhi बहुशः स्वीकृत rahi है। न्याय को प्रश्रय अन्याय ke विनाश तथा जीव (मानव) ko परिस्थिति ke अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों mein अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप mein विष्णु मान्य rahe हैं।

पुराणानुसार विष्णु ki पत्नी लक्ष्मी hain। कामदेव विष्णु जी का पुत्र tha। विष्णु ka निवास क्षीर सागर है। उनका शयन शेषनाग ke ऊपर hai। उनकी नाभि se कमल उत्पन्न hota है जिसमें ब्रह्मा ji स्थित hain।

Bah अपने नीचे वाले बाएँ हाथ mein पद्म (कमल), अपने नीचे वाले दाहिने हाथ mein गदा (कौमोदकी) ,ऊपर wale बाएँ हाथ mein शंख (पाञ्चजन्य) aur apne ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र(सुदर्शन) धारण करते hain।